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अधिकांश आर्थराइटिस से पीड़ित महिलाएं सामान्य गर्भावस्था कर सकती हैं, लेकिन यह इस पर निर्भर करता है कि आर्थराइटिस किस प्रकार का है, रोग की गंभीरता क्या है, और उसका प्रबंधन कितना अच्छा किया गया है।

यहाँ कुछ महत्वपूर्ण बातें ध्यान में रखने योग्य हैं:

रुमेटॉइड आर्थराइटिस (RA): कई महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान लक्षणों में सुधार अनुभव होता है, लेकिन प्रसव के बाद लक्षण दोबारा उभर सकते हैं।

लूपस (SLE): प्रीक्लैम्पसिया, समय से पहले प्रसव या गर्भपात जैसी जटिलताओं का खतरा अधिक होता है। इसलिए नियमित और नज़दीकी निगरानी ज़रूरी है।

सोरियाटिक या एंकिलोज़िंग स्पॉन्डिलाइटिस: आमतौर पर गर्भावस्था के दौरान नियंत्रित किया जा सकता है, हालांकि लक्षणों में बदलाव हो सकता है।

2. प्रजनन क्षमता (Fertility)

आर्थराइटिस स्वयं प्रजनन क्षमता को सामान्यतः प्रभावित नहीं करता, लेकिन कुछ दवाएं इसका असर डाल सकती हैं। इसके अलावा, पुरानी सूजन और तनाव का भी थोड़ा असर हो सकता है।

3. प्रसव पूर्व और प्रसवोत्तर देखभाल

  • उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था के लिए विशेषज्ञ देखभाल की सिफारिश की जाती है।
  • फिजियोथेरेपी और जीवनशैली में सुधार से गर्भावस्था के दौरान और बाद में जोड़ों पर पड़ने वाले दबाव को कम किया जा सकता है।

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